हरदोई/उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में मात्र ₹30 प्रति कुंतल की बढ़ोतरी कर किसानों को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि किसानों की खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। डीजल, खाद, यूरिया, कीटनाशक दवाइयाँ, मजदूरी, जुताई एवं सिंचाई के बढ़े हुए खर्चों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।
भारतीय किसान यूनियन क्रान्ति के प्रदेश अध्यक्ष परविन्दर सिंह यादव ने इस मौके पर कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान लगातार घाटे में खेती करने को मजबूर है। गन्ना किसान दिन-रात मेहनत करके देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम करता है, लेकिन सरकार किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य देने में विफल साबित हो रही है।
उन्होंने कहा कि केवल ₹30 बढ़ाने से किसानों को कोई विशेष लाभ नहीं मिलने वाला है, क्योंकि इससे पहले खेती से जुड़ी लगभग सभी जरूरी चीजों के दाम कई गुना बढ़ाए जा चुके हैं। किसान की लागत बढ़ रही है लेकिन आमदनी नहीं बढ़ रही।
परविन्दर सिंह यादव ने कहा कि देश के किसानों की सबसे बड़ी मांग MSP गारंटी कानून है। जब तक किसानों की फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक किसानों का आर्थिक शोषण बंद नहीं होगा। सरकार को तुरंत MSP गारंटी कानून लागू कर किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय किसान यूनियन क्रान्ति किसानों की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी और यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।









