
जिला संवाददाता आर एन कश्यप
पीलीभीत। पूरनपुर तहसील परिसर इन दिनों किसी सियासी दफ्तर के बजाय किसानों के आक्रोश का केंद्र बना हुआ है।जेठापुर के पास स्थित मुड़िया गांव में भूमि विवाद को लेकर भारतीय किसान यूनियन भानू के बैनर तले किसानों ने जो मोर्चा खोला है, उसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 23 जून से शुरू हुआ यह अनिश्चितकालीन धरना अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जहां चिलचिलाती धूप और गर्मी की परवाह किए बिना किसान अपने हक की खातिर डटे हुए हैं।
प्रदर्शन की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे भी अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए 24 घंटे पूरनपुर तहसील परिसर के नीचे धरने पर बैठे हैं।आंदोलनकारियों का आरोप है कि उप जिलाधिकारी पूरनपुर द्वारा बीते कई दिनों से केवल कोरे आश्वासन दिए जा रहे हैं। किसानों का साफ कहना है कि प्रशासन की फाइलें मेजों पर ही धूल फांक रही हैं और धरातल पर न्याय के नाम पर सिफर हासिल हुआ है। एसडीएम की उदासीनता से नाराज किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
धरना स्थल पर सोमवती, गीता देवी, रामा देवी, खुशहालों देवी, सुमन, खुशबू देवी, विद्या देवी, उर्मिला, रेशमा देवी और रामबेटी जैसी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। वहीं, महेंद्रपाल, अशोक कुमार, शिवकुमार, मदनलाल, धर्मेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार और अधीर कुमार जैसे पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि प्रशासन का कोई भी खोखला वादा अब उन्हें डिगा नहीं सकता। किसानों का कहना है कि जब तक मुड़िया की विवादित जमीन पर उनका मालिकाना हक सुनिश्चित नहीं हो जाता और दोषी अधिकारियों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह धरना तहसील परिसर से हटने वाला नहीं है।
पूरनपुर का यह धरना अब उस मोड़ पर है जहां से पीछे हटने का मतलब अपने हक से समझौता करना है, जिसके लिए ये किसान कतई तैयार नहीं दिख रहे।








