
लखनऊ | नीट जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित पेपर लीक ने एक बार फिर पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 23 लाख छात्रों और उनके परिवारों की वर्षों की मेहनत, उम्मीदें और सपने उस समय टूट गए, जब परीक्षा के बाद पेपर लीक की खबरें सामने आईं और दोबारा परीक्षा की चर्चा शुरू हो गई।
NEET परीक्षा देने वाली छात्रा और पत्रकार परवेज़ अख़्तर की पुत्री अलीना अख़्तर ने सिस्टम की नाकामी पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से पेपर लीक होना जैसे एक फैशन बन गया है। हमने दिन-रात मेहनत करके अपना 100% दिया, लेकिन हर बार छात्रों की मेहनत पर लापरवाही भारी पड़ जाती है। अलीना ने कहा कि छात्रों ने सिर्फ मेहनत ही नहीं की, बल्कि फॉर्म फीस के रूप में करीब 1700 रुपये प्रति छात्र जमा किए। अगर 23 लाख छात्रों के हिसाब से देखा जाए तो सरकार के खाते में लगभग 391 करोड़ रुपये जमा हुए। इसके बावजूद परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता पर सवाल उठना बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि अगर दोबारा परीक्षा कराई जाती है, तो इसकी क्या गारंटी है कि अगली बार पेपर लीक नहीं होगा? आखिर हर बार छात्रों को ही मानसिक तनाव और सिस्टम की लापरवाही की सजा क्यों भुगतनी पड़ती है? नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा हिला दिया है। मां-बाप अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात संघर्ष करते हैं, बच्चे सालों तक मेहनत करते हैं, लेकिन रिज़ल्ट आने से पहले ही सरकारी तंत्र का रिज़ल्ट फेल हो जाता है।
अब बड़ा सवाल यही है क्या देश में मेहनत से ज्यादा मजबूत पेपर लीक माफिया हो चुका है? क्या छात्रों का भविष्य हर साल ऐसे ही दांव पर लगाया जाता रहेगा? सरकार और एजेंसियों को इस पूरे मामले को सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा मानकर सख्त कार्रवाई करनी होगी, ताकि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भरोसा कायम रह सके और छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके |






