February 16, 2026
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लखनऊ: यूपीएसटीएफ ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए विभिन्न बैंकों से करोड़ों रुपए का लोन कराने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड आमिर एहसन को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। आमिर को रविवार को आईआईएम रोड स्थित सहारा होम्स के पास मड़ियांव क्षेत्र से पकड़ा गया। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

यूपीएसटीएफ को शिकायत मिली की कुछ लोग बैंक में अपनी पकड़ बताकर फर्जी लोन करवा रहे हैं। इस दौरान एक पीड़ित ने बताया कि बिना लोन लिए ही उसके मोबाइल पर ईएमआई ड्यू का मैसेज आने लगा। जांच में पता चला कि उसके नाम पर दो लोन हो चुके थे।

मामले के खुलासे के लिए अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने साइबर टीम के साथ जांच शुरू की। टेक्निकल सबूतों की मदद से एसटीएफ ने 13 सितंबर 2025 को गौरव सिंह समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि गिरोह का सरगना आमिर एहसन है। इसके बाद से एसटीएफ उसकी तलाश कर रही थी। रविवार को सुबह करीब 11.30 बजे एसटीएफ ने मड़ियांव इलाके से गिरफ्तार किया।

आरोपी आमिर एहसन ने बताया कि उसने 2017 में यूनिटी कॉलेज हुसैनाबाद से ड्राफ्ट्समैन का डिप्लोमा किया। 2018 में उसकी मुलाकात नावेद से हुई। जिस पर पहले से बैंक फ्रॉड के मामले दर्ज थे। उसके साथ मिलकर जालसाजी शुरू की।

गिरोह ने आधार और पैन कार्ड पर लगी फोटो एडिट कर उनकी जगह अपने सदस्यों की फोटो लगाई। फर्जीं पते पर कंपनियां बनाकर मुद्रा लोन योजना के तहत अलग-अलग बैंकों से लोन पास कराए जाते थे। बैंक कर्मियों से सांठगांठ कर कोटेशन तैयार कराए जाते और फर्जी हस्ताक्षर किए जाते थे।

आरोपियों ने कबूल किया कि अब तक 100 से ज्यादा लोगों, फर्मों और कंपनियों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन लेकर करोड़ों रुपए हड़प चुके हैं।

आरोपी के पास से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं। सभी उपकरणों का फॉरेंसिक टेस्ट कराया जाएगा। गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों और वॉलेट की जांच की जा रही है। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

 

पीड़ित राज बहादुर गुरुंग ने एसटीएफ से शिकायत की। उन्होंने बताया कि कारोबार के लिए लोन की जरूरत थी। उसके मित्र इंद्रजीत सिंह ने नावेद हसन से मिलवाया। जो खुद को बैंक मैनेजरों से परिचित बताता था।

इंद्रजीत उसे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की जानकीपुरम शाखा ले गया। जहां ब्रांच मैनेजर गौरव सिंह के केबिन में पहले से तैयार दस्तावेजों पर कई जगह साइन कराए गए। कुछ दिन बाद और साइन करवाए गए। बाद में नावेद ने लोन न होने की बात कहकर मना कर दिया।

 

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