
ब्यूरो रिपोर्ट लखनऊ
लखनऊ। कहते हैं कि जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तब ऊपर वाला किसी न किसी को ‘फरिश्ता’ बनाकर जरूर भेजता है। जनपद के हरियांवा ब्लॉक के ग्राम बरम्हौला (रमपुरा) के रहने वाले 19 वर्षीय आशीष रैदास के लिए हरदोई के सांसद जय प्रकाश एक ऐसी ही उम्मीद की किरण बनकर सामने आए हैं। नींद में आए हादसे ने छीन ली पैरों की गति गरीब पिता रामस्वरूप का लाडला आशीष जो फरीदाबाद में मेहनत-मजदूरी कर घर का सहारा बनना चाहता था एक रात चार मंजिला इमारत से नीचे गिर गया। इस हादसे ने न केवल उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, बल्कि उसके पूरे शरीर को बिस्तर तक सीमित कर दिया। पिता ने अपने जिगर के टुकड़े को बचाने के लिए अपनी दो बीघा ज़मीन तक बेच दी, एम्स से लेकर लखनऊ तक की खाक छानी, लेकिन आर्थिक तंगी के आगे इलाज की रफ्तार थम गई।जब आशीष की बेबसी और पिता के संघर्ष की दास्तां सांसद जय प्रकाश तक पहुंची, तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए मानवता की मिसाल पेश की। सांसद ने घोषणा की है कि आशीष की दवाओं और इलाज का पूरा खर्च अब वे स्वयं वहन करेंगे। मेडिकल कॉलेज में होगा उपचार सांसद के हस्तक्षेप के बाद अब आशीष का पूरा इलाज मेडिकल कॉलेज में सुचारू रूप से चलेगा। गरीब परिवार को संबल: दवाइयों के भारी-भरकम खर्च से जूझ रहे रामस्वरूप के लिए यह मदद किसी संजीवनी से कम नहीं है। एक नौजवान को इस तरह बेबस नहीं छोड़ा जा सकता आशीष का बेहतर इलाज कराना हमारी प्राथमिकता है और उसके परिवार को हर संभव मदद दिलाई जाएगी। सांसद के इस त्वरित निर्णय की पूरे जनपद में सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि जनप्रतिनिधि हो तो ऐसा, जो अपने क्षेत्र के गरीब के आंसू पोंछने के लिए आधी रात को भी तैयार रहे। अजीत चौहान की इस मार्मिक रिपोर्टिंग ने न केवल आशीष के दर्द को आवाज दी, बल्कि सत्ता के गलियारों तक उस बेबसी को पहुँचाया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है। प्रशासन और जनप्रतिनिधि अपना काम कर रहे हैं, लेकिन आशीष को अभी लंबी जंग लड़नी है। समाज के सक्षम लोग भी आगे आएं ताकि 19 साल का यह नौजवान फिर से अपने पैरों पर खड़ा होकर अपने पिता की लाठी बन सके।







