February 23, 2026
lucknow university

लखनऊ यूनिवर्सिटी में समाजवादी छात्र सभा, NSUI और AISA ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। लाल बारादरी मस्जिद का दरवाजा बंद करने के खिलाफ छात्रों ने रविवार दोपहर पहले बैरिकेडिंग को गिराया। फिर नारेबाजी करते हुए बिल्डिंग के पास पहुंचे और वहां नमाज पढ़ी। शाम को वहीं पर इफ्तार भी किया।

नमाज पढ़ने वाले छात्रों को मानव शृंखला बनाकर हिंदू छात्रों ने घेर लिया। जब वो नमाज पढ़कर उठे तब यह मानव शृंखला हटी। इस दौरान वहां भारी पुलिस बल तैनात रहा। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना कोई नोटिस इस मस्जिद के दरवाजे को सील करके यहां दीवार खड़ा कर दी। उन्होंने सील किए गए दरवाजे को खुलवाने की मांग की।

रविवार को लाल बारादरी परिसर में फेंसिंग लगाने के लिए खुदाई शुरू हुई। इस बीच मौके पर पुलिस बल की तैनाती भी रही। निर्माण कार्य की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में NSUI स्टूडेंट मौके पर पहुंच गए। छात्रों ने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

उनका कहना था कि लाल बारादरी ASI द्वारा संरक्षित स्थल है, इसलिए बिना उसकी अनुमति के कोई भी कंस्ट्रक्शन नहीं किया जा सकता। कुछ स्टूडेंट्स का यह भी आरोप था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस स्थल पर धर्म विशेष के लोगों की एंट्री रोकना चाहता है। इसी मकसद से यहां पूरे परिसर को सील किया जा रहा है।

 

लखनऊ विश्वविद्यालय की कुल सचिव भावना मिश्रा ने बताया कि लाल बारादरी बदहाल हालात में है। वहां फेंसिंग करवाने के लिए निर्माण अधीक्षक को कहा गया था। इस बीच हसनगंज पुलिस को भी पहले से अवगत कराकर पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल की तैनाती के लिए कहा गया है। रविवार को काम शुरू किया गया है। इसमें जो लोग भी रुकावट पैदा करेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

एक पत्र रजिस्ट्रार की तरफ से निर्माण भवन के कार्य अधीक्षक को 2 फरवरी को भेजा गया था। इसमें फेंसिंग बनाने के लिए कहा गया था। इसके बाद रविवार को फेंसिंग बनाने का काम शुरू हुआ। इसके बाद NSUI, समाजवादी छात्रसभा और AISA जैसे गुट के छात्रों ने प्रदर्शन कर फेंसिंग बनाने का विरोध किया।

प्रदर्शन कर रहे समाजवादी छात्रसभा के उपाध्यक्ष महेंद्र ने कहा- मैं एक हिंदू हूं और मस्जिद के समर्थन में प्रदर्शन कर रहा हूं। लखनऊ विश्वविद्यालय में सैकड़ों साल से यहां पर नमाज अदा की जा रही है। रमजान के महीने में इस मस्जिद को सील कर देना बेहद शर्मनाक है। यह दरवाजे पर ताला नहीं लगा है बल्कि आस्था पर ताला लगाया गया है।

धार्मिक मूल्यों पर ताला लगाने की कोशिश की गई है। यह पूरी हरकत संविधान विरोधी है। आर्टिकल-25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है और इस बात की इजाजत देता है कि हम अपने धर्म के हिसाब से धार्मिक कार्य करें। इस हिंदुस्तान में हमें पूजा करने, नमाज पढ़ने से रोक दिया जाएगा यह शर्मनाक है।

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