
रिपोर्ट आशीष तिवारी (ब्यूरोचीफ)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहन रोड पर सड़क चौड़ीकरण का कार्य राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। निर्माण करा रहे ठेकेदार की भारी लापरवाही के चलते रविवार को एक ही स्थान पर सात लोग गिरकर चोटिल हो गए। आरोप है कि ठेकेदार बीच-बीच में सड़क छोड़कर डामर डाल रहा है, जिससे सड़क पर खतरनाक ऊंचे-नीचे गड्ढे बन गए हैं आपको बताते चलें दौली खेड़ा मोड़ बना ‘एक्सीडेंट पॉइंट’ सबसे बदतर स्थिति दौली खेड़ा मोड़ के पास देखी जा रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार ठेकेदार ने यहाँ डामर डालते समय बीच का हिस्सा अधूरा छोड़ दिया है। रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार में आने वाले वाहन चालकों को सड़क की इस ‘ऊंचाई-नीचे’ का अंदाजा नहीं मिल पाता, जिससे संतुलन बिगड़ने के कारण वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। एक दिन में सात लोग अस्पताल पहुंचे स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रविवार को सुबह से शाम तक कुल सात लोग बाइक से फिसलकर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों में कुछ को गहरी चोटें आई हैं। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद ठेकेदार काम को सही ढंग से पूरा करने के बजाय उसे ‘पैच’ में छोड़कर आगे बढ़ गया है। इस अव्यवस्था ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं? ठेकेदार की मनमानी क्या निर्माण के लिए कोई मानक (एसओपी) तय नहीं है? बीच में सड़क छोड़कर डामर डालना तकनीकी रूप से गलत और जानलेवा है। विभाग की चुप्पी पीडब्ल्यूडी या संबंधित विभाग के अधिकारी साइट का निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे हैं? सुरक्षा मानकों का अभाव: निर्माण स्थल पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही रेडियम रिफ्लेक्टर, जिससे रात में बचाव हो सके। स्थानीय लोगों में आक्रोश ग्रामीणों और राहगीरों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों में इस अधूरी सड़क को ठीक नहीं किया गया, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। लोगों की मांग है कि ठेकेदार पर लापरवाही का मुकदमा दर्ज होना चाहिए और घायलों के उपचार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सड़क बनाना विकास का हिस्सा है, लेकिन विकास के नाम पर अधूरी सड़कें छोड़ देना सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है। प्रशासन को समय रहते इस पर संज्ञान लेना चाहिए।








