
आफाक अहमद मंसूरी✍🏻
पत्रकारों में दूरियां खत्म करने का लालबाग से बड़ा ऐलान–
लखनऊ | आज लालबाग से एक ऐसी आवाज़ उठी जिसने समाज और खासकर पत्रकारों के बीच पनप रही ग़ीबत, चुगली और पीठ पीछे वार करने की राजनीति पर सीधा हमला बोला – ‘सबका साथ सबका सम्मान’ की सोच को सिर्फ नारा नहीं बल्कि जमीनी हकीकत बनाने का संकल्प जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के महामंत्री सीनियर पत्रकार अब्दुल वहीद ने लिया |
उन्होंने साफ कहा— “बुराई करने वालों का साथ नहीं, अच्छाई का पक्ष लेना ही असली पत्रकारिता और इंसानियत है, अब्दुल वहीद ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जो लोग संगठनों, महफिलों और बैठकों में बैठकर दूसरों की छवि खराब करने का काम कर रहे हैं, वे न समाज के हितैषी हैं और न पत्रकारिता के, उन्होंने कहा—अगर किसी मंच पर किसी पत्रकार या व्यक्ति की बुराई हो रही है और आप चुप हैं, तो आप भी उस बुराई के हिस्सेदार हैं | उन्होंने ऐलान किया कि अब ग़ीबत और चुगली को नज़र अंदाज़ नहीं किया जाएगा, बल्कि उसी वक्त उसे कुचलते हुए उस व्यक्ति की अच्छाइयों, मेहनत और योगदान को सबके सामने रखा जाएगा—ताकि नकारात्मक सोच रखने वालों के मंसूबे वहीं दम तोड़ दें |
इस मौके पर पत्रकार परवेज़ अख्तर, समाजसेवी नजीब अहमद और अन्य लोगों की मौजूदगी में ये साफ़ कर दिया गया कि ‘सबका साथ, सबका सम्मान’ की ये मुहिम अब लालबाग तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जिला, प्रदेश और देश भर में मजबूती से आगे बढ़ाई जाएगी |
अब्दुल वहीद सिर्फ बातें नहीं करते, उनका व्यवहार खुद उनकी सोच की गवाही देता है, उनका साफ़ दिल, बेबाक लहजा और यारों के यार वाला अंदाज़ उन लोगों के लिए करारा तमाचा है, जो दूसरों को गिराकर खुद ऊंचा दिखना चाहते हैं, वे जहां जाते हैं, वहां साजिशें नहीं, साफ़ बात और साफ़ सोच साथ चलती है—और यही वजह है कि हर महफिल में उनकी मौजूदगी से माहौल बदल जाता है |






