
आज बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के दौरे पर थे। प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कई बड़े नेता बैठे थे। ताज्जुब की बात यह था की प्रधानमंत्री के सामने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी के कई नेता नेता अपने भाषण में बार-बार अटकते रहे। समारोह में विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा के स्वागत भाषण के बाद दूसरे नंबर पर भाषण देने के लिए तेजस्वी यादव को बुलाया गया था और पूर्व डिप्टी सीएम लिखित भाषण पढ़ते नजर आए। तेजस्वी यादव के भाषण के दौरान सबकी नजर उनके अटकने पर गई। लिखित भाषण पढ़ते हुए तेजस्वी यादव कई बार रुके-अटके।
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए वैशाली में स्कूल ऑफ लेजिस्लेटिव स्टडीज जैसी कोई संस्था खोलने की मांग रखी जिसमें विधायी प्रशिक्षण और शोध का काम हो सके। तेजस्वी यादव ने इसके अलावा बिहार के पूर्व सीएम और जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम से मशहूर कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग भी पीएम के समक्ष उठाई। तेजस्वी यादव के बाद तीसरे नंबर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके बाद सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाषण किया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने भाषण में इस बात की ओर सबका ध्यान रेखांकित किया कि बिहार विधानसभा के कैंपस में देश का कोई पहला प्रधानमंत्री आया है। इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी का आभार भी जताया। नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा के इतिहास के बारे में भी लोगों को बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि वो दुनिया के बड़े-बड़े मंच पर कहते हैं कि भारत लोकतंत्र की मां है, भारत लोकतंत्र की जननी है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को यह बात गर्व से बतानी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लिए यह कर्तव्यों की सदी है और अगले 25 साल कर्तव्य पथ पर चलने का समय है। उन्होंने कहा कि इस दौरान कर्तव्य की कसौट पर खुद को कसना होगा और कर्तव्य की पराकाष्ठा को पार करना होगा तभी भारत का वैभव लौटेगा।