February 15, 2026

संवाददाता पीलीभीत बीसलपुर: तहसील क्षेत्र के ग्राम कनपरी में पारम्परिक तालाब, रोड, चकरोड तथा मृत मवेशियों के दफन स्थल की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव के दबंग रामरतन व शिवचरन पुत्रगण रामदयाल पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से तहसील प्रशासन को मोटी रकम देकर पारम्परिक तालाब सहित अन्य सरकारी भूमि पर अवैध मकान निर्माण शुरू करा दिया।इस गंभीर प्रकरण को लेकर भारतीय किसान यूनियन भानु द्वारा तहसील प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। तहसीलदार हबी उर्रहमान ने 13 फरवरी को नायब तहसीलदार वीरपाल सिंह के नेतृत्व में लेखपालों की टीम को मौके पर पैमाइश एवं जांच के लिए भेजा।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पैमाइश के दौरान भूतपूर्व कानूनगो एवं कुछ अन्य लेखपालों से वास्तविक स्थिति की जानकारी ली गई। आरोप है कि जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित दबंगों द्वारा लगभग 16 बीघा भूमि पर कब्जा किया गया है, जबकि सरकारी अभिलेखों (खतौनी) में उनके नाम केवल 12 बीघा जमीन दर्ज है।ग्रामीणों का कहना है कि तहसील प्रशासन के कुछ भ्रष्ट लेखपालों द्वारा पूर्व में कई बार पैमाइश की गई, लेकिन हर बार कथित रूप से रिश्वत के चलते गोलमाल किया गया। अब गांव वासियों की नजर नायब तहसीलदार वीरपाल सिंह व उनकी टीम की निष्पक्ष कार्रवाई पर टिकी है।इस पूरे मामले पर भाकियू भानु के तहसील अध्यक्ष महेंद्र पाल गंगवार (पूर्व सैनिक) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि तहसील प्रशासन ने सरकारी अभिलेखों में दर्ज भूमि से अधिक जमीन दबंगों को देने का प्रयास किया या पैमाइश में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ, तो संगठन पुनः अनिश्चित कालीन धरना-प्रदर्शन एवं उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगा।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था संबंधी किसी भी परिस्थिति की पूर्ण जिम्मेदारी तहसील प्रशासन की होगी।ग्राम कनपरी में यह मुद्दा अब प्रशासन की पारदर्शिता, निष्पक्ष पैमाइश तथा सरकारी भूमि की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय बन गया है। ग्रामीणों एवं भाकियू भानु संगठन की मांग है कि पारम्परिक तालाब, चकरोड तथा मृत मवेशियों के अंत्येष्टि स्थल की भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।प्रशासन की ओर से फिलहाल जांच जारी होने की बात कही जा रही है। अब देखना होगा कि पैमाइश के आधार पर क्या कार्रवाई होती है और विवाद का समाधान किस दिशा में जाता है।

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